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Hisalu (हिसालू)

by Girish Kotnala

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हिसालू वनस्पति जो खासकर पर्वतीय क्षेत्रों में पायी जाती है अपने अद्भुत गुणों के लिए विख्यात है| इसका लेटिन नाम Rubus Ellipticus है जो Rosaceae कुल की झाडीनुमा वनस्पति है और इसे “हिमालयन-रसबेरी” के नाम से भी जाना जाता है|

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Description

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Rubus Ellipticus (Hisalu), commonly known as golden Himalayan raspberry or as yellow Himalayan raspberry, is an Asian species of thorny fruiting shrub in the rose family. Hisalu is wild fruit berry which has yellow color and sweet taste. Prior Hisalu mature in the period of May and June yet because of climatic change the aging period of Hisalu changed into March to April, so the availability of this fruits are in starting of summer season. It is not harvested for domestic use and mostly found in forests. Hisalu perishes quickly after plucking from the thorny bush. Tourists can purchase Hisalu from the road side local sellers or order online from our website.

हिसालू वनस्पति जो खासकर पर्वतीय क्षेत्रों में पायी जाती है अपने अद्भुत गुणों के लिए विख्यात है| इसका लेटिन नाम Rubus Ellipticus है जो Rosaceae कुल की झाडीनुमा वनस्पति है और इसे “हिमालयन-रसबेरी” के नाम से भी जाना जाता है|

आइये जानते है हिसालू खाने के फायदे:-

  • इसमें एंटीआक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाया जाता है|
  • इसकी ताजी जड़ से प्राप्त रस का प्रयोग पेट से सम्बंधित बीमारियों में लाभकारी होता है|
  • इसकी जड़ों को बिच्छुघास (Indian Stinging Nettle) की जड़ एवं जरुल (Lagerstroemia Parviflora) की छाल के साथ कूट कर काढा बनाकर बुखार को दूर करने में प्रयोग किया जाता है|
  • इसके फलों से प्राप्त रस का प्रयोग बुखार, पेट दर्द, खांसी एवं गले के दर्द में बड़ा ही फायदेमंद होता है|
  • इसकी पत्तियों की ताज़ी कोपलों को ब्राह्मी की पत्तियों एवं दूर्वा (Cynodon Dactylon) के साथ मिलाकर रस निकालकर पेप्टिक अल्सर की चिकित्सा में भी उपयोग किया जाता है|
  • इसकी छाल का प्रयोग तिब्बती चिकित्सा पद्धति में भी सुगन्धित एवं कामोत्तेजक प्रभाव के लिए किया जाता है|
  • इस वनस्पति का प्रयोग किडनी-टोनिक के रूप में भी किया जाता है साथ ही साथ नाडी-दौर्बल्य, अत्यधिक मूत्र आना (पोली-यूरिया), योनि-स्राव, शुक्र-क्षय एवं शय्या-मूत्र(बच्चों द्वारा बिस्तर गीला करना) आदि की चिकित्सा में भी किया जाता है|
  • इसके फलों से प्राप्त एक्सट्रेक्ट में एंटी-डायबेटिक प्रभाव भी देखे गए हैं|

** हिसालू जैसी वनस्पति को सरंक्षित किये जाने की आवश्यकता को देखते हुए इसे आई.यू.सी.एन. द्वारा वर्ल्ड्स हंड्रेड वर्स्ट इनवेसिव स्पेसीज की लिस्ट में शामिल किया गया है|**

साभार: डॉ. नवीन चंद्र जोशी

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