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Chakrata Rajma

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Gahat Dal (गहत दाल)

200.00 190.00
Macrotyloma uniflorum (horse gram, kulthi bean, hurali, Madras gram) is one of the lesser known beans. The horse gram is normally used to feed horses, though it is also commonly used in cooking. In traditional Ayurvedic cuisine, horse gram is considered a food with medicinal qualities. It is prescribed for persons suffering from jaundice or water retention and as part of a weight loss diet. पहाड़ में सर्द मौसम में गहत की दाल लजीज मानी जाती है। प्रोटीन तत्व की अधिकता से यह दाल शरीर को ऊर्जा देती है, साथ ही पथरी के उपचार की औषधि भी है। यूं तो गहत आमतौर पर एक दाल मात्र है, जो पहाड़ की दालों में अपनी विशेष तासीर के कारण खास स्थान रखती है| यह दाल गुर्दे के रोगियों के लिए अचूक दवा मानी जाती है। आज हम फिर बात कर रहे हैं उत्तराखंड के एक ऐसे बहुमूल्य उत्पाद की जिसका नाम सुनते ही हमें इससे अपना परम्परागत सम्बन्ध याद आने लगता है। गहत उत्तराखण्ड में उगायी जाने वाली एक महत्वपूर्ण फसल है जिसका वैज्ञानिक नाम Macrotyloma uniflorum L. जो कि Fabaceae कुल का पौधा है। इसे ही Dolichos uniflorum भी कहते हैं। वैसे तो गहत का मुख्य स्रोत अफ्रीका माना जाता है लेकिन भारत में इसका इतिहास बहुत पुराना है। विश्व में पाए जाने वाली कुल 240 प्रजातियों में से 23 प्रजातियां सिर्फ भारत में पायी जाती हैं जबकि शेष प्रजातियां अफ्रीका में पायी जाती हैं। गहत को इसके अलावा और भी बहुत नामों से जाना जाता है जैसे कि अंग्रेजी में Horse gram, हिन्दी में कुलध, तेलुगू में उलावालु, कन्नड़ में हुरूली, तमिल में कोलू, संस्कृत में कुलत्थिका, गुजराती में कुल्थी तथा मराठी में डुल्गा आदि। भारत के अलावा चीन, नेपाल, भूटान, पाकिस्तान, श्रीलंका तथा इंडोनेशिया में भी गहत का उत्पादन किया जाता है। मुख्य रूप से भारत में गहत का उत्पादन लगभग सभी राज्यों में किया जाता है लेकिन कुछ प्रमुख राज्यों से भारत के कुल उत्पादन में 28 प्रतिशत कर्नाटक, 18 प्रतिशत तमिलनाडु, 10 प्रतिशत महाराष्ट्र, 10 प्रतिशत ओडिशा तथा 10 प्रतिशत आंध्र प्रदेश का योगदान है। भारत में गहत मुख्यतः रूप से असिंचित दशा में उगाया जाता है और जहां तक उत्तराखण्ड में गहत उत्पादन है यह परम्परागत दूरस्थ खेतो में उगाया जाता है क्योंकि गहत की फसल में सूखा सहन करने की क्षमता होती है, साथ ही नाइट्रोजन फिक्ससेशन करने की भी क्षमता होती है। इसकी खेती के लिये 20 से 30 डिग्री सेल्शियस, जहाँ 200 से 700 मिलीमीटर वर्षा होती है, उपयुक्त पायी जाती है। गहत बीज का उत्पादन भारत में 150 से 300 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर किया जाता था, मगर आई0सी0आर0आई0एस0ए0टी0, हैदराबाद द्वारा वर्ष 2005 में उच्च गुणवत्ता वाली प्रजाति विकसित की गयी जिससे गहत बीज उत्पादन बढ़कर 1100 से 2000 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गया है। गहत की मुख्यतः 02 प्रजातियां पायी जाती हैं जिनमें से कि एक जंगली तथा दूसरी खेती कर उगायी जाती हैं। यहां सामान्यतः गहत के बीज लाल, सफेद, काला तथा भूरा रंग के पाये जाते हैं। गहत को सामान्यतः दाल के रूप में प्रयोग किया जाता है जो कि गरीबों के भोजन में शामिल किया गया है। गहत में प्रोटीन तथा कार्बोहाईड्रेड की प्रचूर मात्रा होने के कारण आज गहत का उपयोग सम्पूर्ण विश्व में विभिन्न खाद्य तथा पोषक पदार्थों के रूप में किया जा रहा है। इसके बीज में कार्बोहाईड्रेड 57.3 ग्राम, प्रोटीन 22.0 ग्राम, फाइबर 5.3 ग्राम, कैरोटीन 11.9 आई0यू0, आयरन 7.6 मिलीग्राम, कैल्शियम 0.28 मिलीग्राम, मैग्नीशियम 0.18 मिलीग्राम, मैग्नीज 37.0 मिलीग्राम, फोस्फोरस 0.39 मिलीग्राम, कॉपर 19.0 मिलीग्राम तथा जिंक 0.28 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम तक पाये जाते हैं। परम्परागत रूप से ही गहत का उपयोग इसकी विशेषताओ के अनुरूप किया जाता है। इसकी प्रकृति गरम माने जाने के कारण इसका मुख्य उपयोग सर्दियों में या अधिक ठंड होने पर अधिक किया जाता है। दास, 1988 तथा पेसीन, 1999 द्वारा अपने शोध में गहत को कैल्शियम तथा कैल्शियम फास्फेट स्टोन को गलाने तथा बनने से रोकने के लिये पाया गया। एक आयुर्वेदिक औषधि सिस्टोन में भी गहत को मुख्य भाग में लिया जाता है जो कि किडनी स्टोन के लिये प्रयोग की जाती है। इसके अलावा अन्य विभिन्न शोधों में भी इसके उपयोग को किडनी रोगो के रूप में उपयुक्त पाया गया है। इसमें फाइटिक एसिड तथा फिनोलिक एसिड की अच्छी मात्रा होने के कारण इसे सामान्य कफ, गले में इन्फेक्शन , बुखार तथा अस्थमा आदि में प्रयोग किया जाता है। भारतीय कैमिकल टैक्नोलॉजी संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा किये गये एक शोध में बताया गया है कि गहत के बीज में प्रोटीन टायरोसिन फॉस्फेटेज 1-बीटा एन्जाइम को रोकने की क्षमता होती है जो कि कार्बोहाईड्रेड के पाचन को कम कर शुगर को घटाने में मदद करता है तथा साथ ही शरीर में इन्सुलिन रेजिसटेंस को भी कम करता है। उत्तराखण्ड में गहत को बाजार उपलब्ध न होने के कारण स्थानीय काश्तकार केवल स्थानीय विनिमय प्रणाली के अन्तर्गत चावल, नमक एवं नगदी के बदले बेच देते हैं जबकि राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर में गहत 100 से 200 रूपये प्रति किलोग्राम तक बेचा जाता है। उत्तराखण्ड गहत स्वयं में एक ब्रांड होने के कारण बड़े बाजारों में इसकी मांग रहती है जिसकी औषधीय तथा न्यूट्रास्यूटिकल महत्ता को देखते हुये आज विभिन्न कम्पनियां नये-नये शोध कर उत्पाद बना रही है तथा भविष्य में इसकी बढ़ती मांग हेतु इसके बहुतायत उत्पादन की आवश्यकता है। राज्य के परिप्रेक्ष्य में गहत की खेती यदि वैज्ञानिक एवं व्यवसायिक रूप में की जाय तथा दूरस्थ खेतो में जो कि बंजर होते जा रहे है में भी की जाये तो यह राज्य की आर्थिकी का एक बेहतर प्रायः बन सकता है।
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Harshil Rajma

Just Organik Harshil Rajma is grown and harvested above 2200 Meter height in Harshil valley in a very pleasant high Himalayan atmosphere-across Gangotri National Park.The organic quality Harshil Rajma absorbs water very quickly therefore easily soaked and dissolved in water.Takes at least 1/3rd less time for cooking so it is boiled & cooked very easily.It has a strong flavour with slightly sweet aftertaste. The tasteful thick gravy with robust flavour makes it a welcome addition to salads, soups and rice dishes. The important characteristics of these beans are highly fibrous, anti-acidic & easily digestible, hence as a result people experience a pleasant Zero flatulence feeling .The dietary fiber present in these beans helps in lowering blood cholesterol levels in the body. Famous Himalayan Harshil Rajma(Kidney beans) from Gangotri Valley of Uttarakhand.A famous pulse being grown in completely non polluted and chemical free environment of place called Harshil or Harsil in Uttarakhand. Harshil Rajma is a very good source of cholesterol lowering fibers and virtually fat free quality protein. its fiber content prevents blood sugar level from rising rapidly after meal.Grown organically in the Gangotri Valley of Uttarakhand, Harshil Rajma has a distinct aroma and flavour, and takes very less time to cook. It is generally served with steamed rice or roti,which makes it an ideal staple for everyday consumption and is a popular pahadi delicacy in the hills of Kumaon and Garhwal region of the Himalayan state. One of the most popular vegetarian delicacies of North India, the organic Harshil Rajma from the pristine Himalayan valleys is sure to satiate your taste buds. Whip it up with onion, tomatoes and Indian spices and garnish it with coriander leaves for a truly unforgettable meal. Brownish white in colour, the taste of Harshil Rajma is completely unique.
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Kaale Bhatt (काले भट्ट)

150.00 140.00
The black turtle bean is a small, shiny variety of the common bean. The black turtle bean has a dense, meaty texture, which makes it popular in vegetarian dishes छोटे-छोटे काले, चिकने से दिखने वाले भट्ट भारत में ही नहीं, अमेरिका में भी आम तौर पर खाए जाते हैं। ये एंटी-ऑक्सीडेंट्स का अच्छा स्रोत होते हैं। महज एक कप काले बीन्स के सेवन से 90 प्रतिशत तक फोलेट प्राप्त किया जा सकता है। भट्ट में 109 कैलोरी, 20 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 8 ग्राम फाइबर पाया जाता है। 100 ग्राम काली बीन्स में 1500 मिलीग्राम पोटैशियम, 9 मिलीग्राम सोडियम और 21 ग्राम प्रोटीन की मात्रा पाई जाती है। साथ ही इसमें मौजूद विटामिन ए, बी12, डी और कैल्शियम भी स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होता है। बीन्स में फैट की मात्रा तो कम होती ही है, साथ ही इससे शरीर के लिए आवश्यक ओमेगा-3 और ओमेगा-6 की पूर्ति भी होती है। फायदे भट्ट कोलेस्ट्रॉल कम करने वाले फाइबर का अच्छा स्रोत है। थायामीन(विटामिन बी1), फॉस्फोरस, आयरन, कॉपर, मैग्नीशियम और पोटैशियम की भी अच्छा स्रोत है। वसा की मात्रा बहुत कम होती है, लेकिन साथ ही इसमें गैस बनाने वाले एंजाइम्स भी होते हैं, इसलिए हमेशा इसे पकाने से पहले कुछ देर के लिए भिगोकर रखना चाहिए। कोलेस्ट्रॉल कम करने के साथ ही इसमें मौजूद फाइबर ब्लड में ग्लूकोज की मात्रा को तेजी से बढ़ने से रोकता है, जो इन दालों को डायबिटीज, इंसुलिन रेसिसटेंट या हाईपोग्लाईसिमिया से जूझ रहे रोगियों के लिए उपयुक्त बनाता है। गर्भवती महिलाओं के लिए काले बीन्स में मौजूद फोलेट बच्चे के विकास में बहुत फायदेमंद होते हैं। बीन्स के उपयोग से आपकी वेस्टलाइन के बढ़ने की संभावना 23 फीसदी कम हो जाती है
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Mix Rajma (मिक्स राजमा)

Uttarakhand is home to more than two hundred varieties of Rajma, grown extensively across the state as a cash crop by marginal farmers. Rich in vitamins and other minerals, H2H Rajma is a good source of protein & carbohydrates. Local name : Rajma , chemi Botanical Name : Phaseolus vulgairs
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Munsiyari Rajma

Uttarakhand is home to more than two hundred varieties of Rajma, grown extensively across the state as a cash crop by marginal farmers. Free from any chemical or pesticide, Munshyari Rajma derives its name from Munshyari - Located at an altitude of 7,200 ft, Situated at the entrance of Johar valley Rich in vitamins and other minerals, H2H Munsiyari Rajma is a good source of protein & carbohydrates. Due to its unique and subtle taste, high fiber content and color, this Rajma is favorite of all ages. Cooking Instructions : Wash and soak the rajma overnight. Then, drain and rinse the beans. Add soaked beans and water to a pressure cooker. The water should top the beans by about 2". Lock in the lid. Turn on heat. Cook for 15 minutes. Turn off the flame. Wait till the pressure has dropped, then open and drain the excess water. Use the cooked beans as required.
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Navrangi Dal

सबसेसुपाच्य 9 रंगी दाल: विविध आकर्षण 9 रंगों में उगने वाली , नौंरंगी की दाल की बनावट पर यदि नज़रडालें तो यह 12 -13 किस्मों में दिखाई देगी | इसे रैस , रैयांस, तित्र्य दाल व झिलंगा आदि नामों से जानाजाता है | अंग्रेजी में इसेराइसबीन कहते हैं | नौंरंगीदाल की पोषण की सच्चाई यदि देखें तो यह उड़द और मुंग से भी बेहतर है | इसमें अच्छा प्रोटीन पाया जाता है साथही राजमा , उड़द की अपेक्षा अधिकरेशा भी मिलता है | नौंरंगीदाल खाने से गैस नहीं बनती , यहसबसे हल्की दाल है आसानी से हज्म होती है | अलग स्वाद वाली यह दाल झंगोर और भात केसाथ मजेदार लगती है | इसकासूप जोरदार होता है | इसकेपरांठे व भरवा रोटी लजीज बनते हैं | A rare Dal from the Himalayas, Naurangi is a nine grain dal and is packed with protein and dietary fibre. It is probably the least known and the best looking of the great Indian lentil family. Grown in the lush hills of Kumaon and Garhwal, the very small multi coloured seeds of this plant are an aesthetic delight even before one starts cooking. Just one cup of cooked Daal can give you as much as 62 per cent of your daily dietary fibre and many important minerals like manganese, phosphorous, potassium, iron and copper. They are high in folates and the B-vitamins like Thiamin. Just Organik Navrangi Dal is a rich source of proteins, vitamins, fiber, minerals and carbohydrates • It has various curative properties and has low cholesterol as well as low fat • Navrangi Dal is good for Diabetic and Heart Patients • These are particularly small in size and have an enhanced taste and are used to make soup, stews, salads and spicy dals.
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Pigeon Pea (तूअर दाल)

The pigeon pea (Cajanus cajan) is a perennial legume from the family Fabaceae. Since its domestication in India at least 3,500 years ago, its seeds have become a common food grain in Asia, Africa, and Latin America. It is consumed on a large scale mainly in south Asia and is a major source of protein for the population of that subcontinent. The pigeon pea is known by numerous names with different etymologies, "tropical green pea", gungo pea in Jamaica, 'tuver' 'tour'or 'arhar' in India, 'red gram' and gandule bean. अरहर की दाल को तुवर भी कहा जाता है। इसमें खनिज, कार्बोहाइड्रेट, लोहा, कैल्शियम आदि पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। यह सुगमता से पचने वाली दाल है, अतः रोगी को भी दी जा सकती है, परंतु गैस, कब्ज एवं साँस के रोगियों को इसका सेवन कम ही करना चाहिए। भारत में अरहर की खेती तीन हजार वर्ष पूर्व से होती आ रही है किन्तु भारत के जंगलों में इसके पौधे नहीं पाये जाते है। अफ्रीका के जंगलों में इसके जंगली पौधे पाये जाते है। इस आधार पर इसका उत्पत्ति स्थल अफ्रीका को माना जाता है। सम्भवतया इस पौधें को अफ्रीका से ही एशिया में लाया गया है। दलहन प्रोटीन का एक सस्ता स्रोत है जिसको आम जनता भी खाने में प्रयोग कर सकती है, लेकिन भारत में इसका उत्पादन आवश्यकता के अनुरूप नहीं है। यदि प्रोटीन की उपलब्धता बढ़ानी है तो दलहनों का उत्पादन बढ़ाना होगा। इसके लिए उन्नतशील प्रजातियां और उनकी उन्नतशील कृषि विधियों का विकास करना होगा। अरहर एक विलक्षण गुण सम्पन्न फसल है। इसका उपयोग अन्य दलहनी फसलों की तुलना में दाल के रूप में सर्वाधिक किया जाता है। इसके अतिरिक्त इसकी हरी फलियां सब्जी के लिये, खली चूरी पशुओं के लिए रातव, हरी पत्ती चारा के लिये तथा तना ईंधन, झोपड़ी और टोकरी बनाने के काम लाया जाता है। इसके पौधों पर लाख के कीट का पालन करके लाख भी बनाई जाती है। मांस की तुलना में इसमें प्रोटीन भी अधिक (21-26 प्रतिशत) पाई जाती है। तूर दाल प्रोटीन का बहुत बड़े स्रोत हैं. तूर की दाल भारत में प्रमुखता से खायी जाती है.तूर की दाल खाने से बॉडी को कई न्यूट्रि‍शंस प्रोटीन, फैट, कार्बोहाइड्रेट्स जैसे पोषक तत्व मिलते हैं. तूर की दाल प्रोटीन और फाइबर का बहुत बड़ा स्रोत हैं. साथ ही ये कॉलेस्ट्रॉल फ्री है. अरहर की दाल को चावल के साथ खाने से प्रोटीन की कमी नहीं रहती. तूर दाल की दाल आयरन, फोलिक एसिड, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम, विटामिन बी और मिनरल्स की कमी को पूरा करता है. तूर में मौजूद फोलिक एसिड महिलाओं को बहुत फायदा पहुंचाता है. ये महिलाओं के लिए विटामिन का अच्‍छा स्रोत्र है. खासतौर पर गर्भवती महिलाओं के लिए. न्‍यूयॉर्क की एक रिसर्च के मुताबिक, भरपूर मात्रा में फोलिक एसिड लेने से दिमाग और रीढ़ की हड्डियों संबंधित बीमारियों से बच सकते हैं. तूर दाल कार्बोहाइड्रेट्स का अच्छा स्रोत्र है जिससे शरीर को एनर्जी मिलती है. जब आप कार्बोहाइड्रेट युक्त खाद्य पदार्थ खाते हैं तो ये शरीर में जाकर ग्लूकोज या ब्लड शुगर में ब्रेक हो जाता है. इसके बाद ब्लड शुगर इससे बॉडी, दिमाग और नर्वस सिस्टम को एनर्जी देता है. तूर दाल फाइबर का एक अच्छा स्रोत हैं जिससे कब्ज की समस्या से छुटकारा मिलता है. फाइबर युक्त डायट लेने से क्रोनिक डिजीज नहीं होती. नियमित रूप से फाइबर डायट में शामिल करने से दिल संबंधी रोग, स्ट्रोक, कई तरह के कैंसर, कार्डियोवस्कुलर डिजीज और टाइप 2 डायबिटीज से बचा जा सकता है.
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Red Rajma (लाल राजमा)

Red Kidney beans from Uttarakhand. You would notice it takes less amount of beans and cooks faster compared to normally available varieties. Kidney beans are integral part of the cuisine in northern regions of India where the beans are known as rajma and are used in a dish of the same name. The hill variety grown variously in Himachal Pradesh, Uttarakhand, Jammu & Kashmir are red in colour with small bean size. This particular type is more popular in these regions. While the bigger red and chitra or speckled beans are more famous in other northern states. Raw kidney beans contain relatively high amounts of phytohemagglutinin, and thus are more toxic than most other bean varieties if not pre-soaked and subsequently heated to the boiling point for at least 10 minutes. The beans are highly nutritious and are one of the famous dishes in hotels and restaurants. Kidney beans may help in preventing cancer. Kidney beans may improve brain function. Kidney beans may control blood sugar levels and may prevent diabetes. Kidney beans are high source of protein. Kidney beans may help in bone strength/prevent osteoporosis Kidney beans may help in preventing bad cholesterol (LDL). Kidney beans help in maintaining healthy skin. Kidney beans are rich in fiber. Kidney beans may help in preventing irritable bowel syndrome (IBS). Kidney beans are heart healthy. Kidney beans help weight loss due to its high fiber content.
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Soyabean Dal (सोयाबीन भट्ट)

140.00
Glycine max, commonly known as soybean in North America or soya bean,[3] is a species of legume native to East Asia, widely grown for its edible bean which has numerous uses. Fat-free (defatted) soybean meal is a significant and cheap source of protein for animal feeds and many packaged meals. For example, soybean products, such as textured vegetable protein (TVP), are ingredients in many meat and dairy substitutes.[4] The beans contain significant amounts of phytic acid, dietary minerals and B vitamins. Soy vegetable oil, used in food and industrial applications, is another product of processing the soybean crop. Traditional non-fermented food uses of soybeans include soy milk from which tofu and tofu skin are made. Fermented soy foods include soy sauce, fermented bean paste, natto and tempeh. सोयाबीन में प्रोटीन की मात्रा बहुत अधिक होती है। और इसमें विटामिन बी कॉम्प्लेक्स और विटामिन ए भी भरपूर मात्रा में पाए जाते है। ये सभी तत्व हमारे शरीर के लिए आवश्यक अमीनो एसिड का काम करते हैं। उत्तराखंड में सोयाबीन का काफी इस्तेमाल किया जाता है, दाल के अलावा भी सोयाबीन से कई प्रकार के व्यंजन बनाये जाते है| सोयाबीन एक फसल है। यह दलहन के बजाय तिलहन की फसल मानी जाती है। सोयाबीन मानव पोषण एवं स्वास्थ्य के लिए एक बहुउपयोगी खाद्य पदार्थ है। सोयाबीन एक महत्वपूर्ण खाद्य स्रोत है। इसके मुख्य घटक प्रोटीन, कार्बोहाइडेंट और वसा होते है। सोयाबीन में 33 प्रतिशत प्रोटीन, 22 प्रतिशत वसा, 21 प्रतिशत कार्बोहाइडेंट, 12 प्रतिशत नमी तथा 5 प्रतिशत भस्म होती है। सोयाप्रोटीन के एमीगेमिनो अम्ल की संरचना पशु प्रोटीन के समकक्ष होती हैं। अतः मनुष्य के पोषण के लिए सोयाबीन उच्च गुणवत्ता युक्त प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत हैं। कार्बोहाइडेंट के रूप में आहार रेशा, शर्करा, रैफीनोस एवं स्टाकियोज होता है जो कि पेट में पाए जाने वाले सूक्ष्मजीवों के लिए लाभप्रद होता हैं। सोयाबीन तेल में लिनोलिक अम्ल एवं लिनालेनिक अम्ल प्रचुर मात्रा में होते हैं। ये अम्ल शरीर के लिए आवश्यक वसा अम्ल होते हैं। इसके अलावा सोयाबीन में आइसोफ्लावोन, लेसिथिन और फाइटोस्टेरॉल रूप में कुछ अन्य स्वास्थवर्धक उपयोगी घटक होते हैं। सोयाबीन न केवल प्रोटीन का एक उत्कृष्ट स्त्रौत है बल्कि कई शारीरिक क्रियाओं को भी प्रभावित करता है। विभिन्न शोधकर्ताओं द्वारा सोया प्रोटीन का प्लाज्मा लिपिड एवं कोलेस्टेरॉल की मात्रा पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया गया है और यह पाया गया है कि सोया प्रोटीन मानव रक्त में कोलेस्टेरॉल की मात्रा कम करने में सहायक होता है। निर्दिष्ट स्वास्थ्य उपयोग के लिए सोया प्रोटीन संभवतः पहला सोयाबीन घटक है। The amount of protein in soybean is very high. And vitamin B complex and vitamin A are also found in abundance. All these elements work as essential amino acids for our body. Soya bean is widely used in Uttarakhand, in addition to pulses, soya bean is made from a variety of dishes.  
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Urad dal (काली दाल)

150.00
उड़द की दाल जिसे उत्तराखंड में (काली दाल) कहते है| आमतौर पर इसका उपयोग दाल के लिए ही किया जाता है। परन्तु इस दाल को इसमें मौजूद पोषक तत्वों के लिए भी जाना जाता है। उड़द में प्रोटीन, आवश्यक खनिज, कई तरह के विटामिन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो कि हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होते हैं। इसकी तासीर ठंडी होती है, अतः इसका सेवन करते समय शुद्ध घी में हींग का बघार लगा लेना चाहिए। इसमें भी कार्बोहाइड्रेट, विटामिन्स, केल्शियम व प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। बवासीर, गठिया, दमा एवं लकवा के रोगियों को इसका सेवन कम करना चाहिए। कई अन्य बीन्स की तरह उड़द में भी फाइबर बहुत अधिक होता है जो जठरांत्र की किसी भी समस्या को कम करने में मदद करता है। उड़द दाल में आयरन पाया जाता है जो शरीर में ऊर्जा के स्तर को बढ़ाने के साथ साथ जीवन शक्ति में वृद्धि करने का एक आदर्श तरीका है। उड़द दाल में कैल्शियम, फास्फोरस, पोटेशियम, आयरन सहित मैग्नीशियम पाया जाता है जो हड्डियों के खनिज घनत्व बनाए रखने में मदद करते हैं। फाइबर युक्त भोजन उन लोगों के लिए जो मधुमेह की समस्या से ग्रसित हैं या जिन्हें मधुमेह की समस्या हो सकती है, इनके लिए यह सामान्यतः अनुशंसित भोजन है। आयुर्वेदिक उपचार में लगभग हर प्रकार की त्वचा समस्या के लिए उड़द दाल का उपयोग काढ़े और पेस्ट के रूप में किया जाता है। उड़द दाल का उपयोग पूरे शरीर में दर्द और सूजन से राहत पाने के लिए सबसे पुराना और सबसे विश्वसनीय आयुर्वेदिक उपचारों में से एक है। उड़द दाल में पाया जाने वाला फाइबर, पोटेशियम और मैग्नीशियम दिल की स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। Vigna mungo, black gram, urad bean, minapa pappu, mungo bean or black matpe bean (māṣa) is a bean grown in the Indian subcontinent. At one time it was considered to belong to the same species as the mung bean. The product sold as black lentil is usually the whole urad bean, whereas the split bean (the interior being white) is called white lentil. It should not to be confused with the much smaller true black lentil (Lens culinaris). Urad Dal which is called (black dal) in Uttarakhand. It is usually used only for pulses. But this pulse is also known for its nutrients present in it. Urad contains proteins, essential minerals, many types of vitamins, fibers and antioxidants that are beneficial for our health.
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White Rajma

Uttarakhand is home to more than two hundred varieties of Rajma, grown extensively across the state as a cash crop by marginal farmers. Rich in vitamins and other minerals, H2H Rajma is a good source of protein & carbohydrates. Local name : Rajma , chemi Botanical Name : Phaseolus vulgairs
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