Pigeon Pea (तूअर दाल)

by Girish Kotnala

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Description

The pigeon pea (Cajanus cajan) is a perennial legume from the family Fabaceae. Since its domestication in India at least 3,500 years ago, its seeds have become a common food grain in Asia, Africa, and Latin America. It is consumed on a large scale mainly in south Asia and is a major source of protein for the population of that subcontinent. The pigeon pea is known by numerous names with different etymologies, “tropical green pea”, gungo pea in Jamaica, ‘tuver’ ‘tour’or ‘arhar’ in India, ‘red gram’ and gandule bean.

अरहर की दाल को तुवर भी कहा जाता है। इसमें खनिज, कार्बोहाइड्रेट, लोहा, कैल्शियम आदि पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। यह सुगमता से पचने वाली दाल है, अतः रोगी को भी दी जा सकती है, परंतु गैस, कब्ज एवं साँस के रोगियों को इसका सेवन कम ही करना चाहिए।

भारत में अरहर की खेती तीन हजार वर्ष पूर्व से होती आ रही है किन्तु भारत के जंगलों में इसके पौधे नहीं पाये जाते है। अफ्रीका के जंगलों में इसके जंगली पौधे पाये जाते है। इस आधार पर इसका उत्पत्ति स्थल अफ्रीका को माना जाता है। सम्भवतया इस पौधें को अफ्रीका से ही एशिया में लाया गया है।

दलहन प्रोटीन का एक सस्ता स्रोत है जिसको आम जनता भी खाने में प्रयोग कर सकती है, लेकिन भारत में इसका उत्पादन आवश्यकता के अनुरूप नहीं है। यदि प्रोटीन की उपलब्धता बढ़ानी है तो दलहनों का उत्पादन बढ़ाना होगा। इसके लिए उन्नतशील प्रजातियां और उनकी उन्नतशील कृषि विधियों का विकास करना होगा।

अरहर एक विलक्षण गुण सम्पन्न फसल है। इसका उपयोग अन्य दलहनी फसलों की तुलना में दाल के रूप में सर्वाधिक किया जाता है। इसके अतिरिक्त इसकी हरी फलियां सब्जी के लिये, खली चूरी पशुओं के लिए रातव, हरी पत्ती चारा के लिये तथा तना ईंधन, झोपड़ी और टोकरी बनाने के काम लाया जाता है। इसके पौधों पर लाख के कीट का पालन करके लाख भी बनाई जाती है। मांस की तुलना में इसमें प्रोटीन भी अधिक (21-26 प्रतिशत) पाई जाती है।

तूर दाल प्रोटीन का बहुत बड़े स्रोत हैं. तूर की दाल भारत में प्रमुखता से खायी जाती है.तूर की दाल खाने से बॉडी को कई न्यूट्रि‍शंस प्रोटीन, फैट, कार्बोहाइड्रेट्स जैसे पोषक तत्व मिलते हैं.

तूर की दाल प्रोटीन और फाइबर का बहुत बड़ा स्रोत हैं. साथ ही ये कॉलेस्ट्रॉल फ्री है. अरहर की दाल को चावल के साथ खाने से प्रोटीन की कमी नहीं रहती.

तूर दाल की दाल आयरन, फोलिक एसिड, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम, विटामिन बी और मिनरल्स की कमी को पूरा करता है.

तूर में मौजूद फोलिक एसिड महिलाओं को बहुत फायदा पहुंचाता है. ये महिलाओं के लिए विटामिन का अच्‍छा स्रोत्र है. खासतौर पर गर्भवती महिलाओं के लिए. न्‍यूयॉर्क की एक रिसर्च के मुताबिक, भरपूर मात्रा में फोलिक एसिड लेने से दिमाग और रीढ़ की हड्डियों संबंधित बीमारियों से बच सकते हैं.

तूर दाल कार्बोहाइड्रेट्स का अच्छा स्रोत्र है जिससे शरीर को एनर्जी मिलती है. जब आप कार्बोहाइड्रेट युक्त खाद्य पदार्थ खाते हैं तो ये शरीर में जाकर ग्लूकोज या ब्लड शुगर में ब्रेक हो जाता है. इसके बाद ब्लड शुगर इससे बॉडी, दिमाग और नर्वस सिस्टम को एनर्जी देता है.

तूर दाल फाइबर का एक अच्छा स्रोत हैं जिससे कब्ज की समस्या से छुटकारा मिलता है. फाइबर युक्त डायट लेने से क्रोनिक डिजीज नहीं होती. नियमित रूप से फाइबर डायट में शामिल करने से दिल संबंधी रोग, स्ट्रोक, कई तरह के कैंसर, कार्डियोवस्कुलर डिजीज और टाइप 2 डायबिटीज से बचा जा सकता है.

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Girish Kotnala